मधुमक्खियां एक अद्भुत प्राणी है | उनकी अपनी एक अलग भाषा है और वे पारस्थितिक तंत्र के लिए इतना कुछ करती है | आपके ग्राम या शहर के आसपास जितने भी मूल पौधे है एवं खेती में प्राप्त होने वाली जितनी भी फसले होते है, आमतौर पर उन सबको परागकारी मधुमक्खियों पर निर्भर रहना पड़ता है |
मधुमक्खी पालक काहीत ओज़तुर्क एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी में मधुमक्खी के एक छत्ते का निरीक्षण करते हुए | फोटो: सी जे काज़िलेक |
हाल ही में, अमेरिका एवं यूरोप के मधुमक्खी पालकों ने मधुमक्खियों के छत्तो में असामान्य क्षति को नोटिस किया | वैज्ञानिकों ने इसके लिए जिम्मेदार कई कारको का उल्लेख किया जो आधुनिक मधुमक्खी पालन में उपयोग होते है | इसका अर्थ है की इसका कोई एक विशेष कारण नहीं है अपितु कई कारको का संयोजन है जो मधुमक्खी के स्वास्थ्य को क्षीण बना रहे है |
रसायनो जैसे कुछ कीटनाशकों का वातावरण में अधिक समय में रहना भी मधुमक्खियों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है |
फ़िलहाल मधुमक्खियां ठीक संख्या में है | अभी इनके विलुप्त होने के कोई आसार नहीं है हालांकि इनसे सम्बंधित कुछ अन्य प्रकार के कीट विलुप्त होने की और अग्रसर है | भँवरे एवं कुछ अन्य देसी प्रजातियां मधुमक्खियों की तुलना में बीमारियों एवं कीटनाशकों से अधिक प्रभावित होती है | इसीलिए हम सबको मिलकर मधुमक्खियों की रक्षा करने का प्रयास करना चाहिए |
अपने घर के आसपास एवं बगीचों में उस क्षेत्र में मूल पौधे लगाए ना की विदेशी फैंसी पौधे | इससे न केवल मधुमक्खियों को फायदा होगा बल्कि पूरे पारस्थितिकी तंत्र को |
कीटनाशकों का छिड़काव न करे | यदि जरूरी ही हो तो रात के समय ये उपयोग करे जब मधुमक्खियां पौधों के आसपास ना हो |
अपने घर के पास के कृषि अधिकारी या कॉलेज के कीट विज्ञान के प्रोफेसर से संपर्क करके अपने क्षेत्र की मधुमक्खियों की प्रजाति के बारे में जानकारी ले | आप वे पौधे लगा सकते है जो उन्हें पसंद है या फिर कुछ ऐसी संरचना बना सकते है जिसकी ओर वे आकर्षित हो और अपना छत्ता आपके बगीचे में बना सके | उदाहरण के तौर पर 'ऑर्किड बी' और 'कारपेंटर बी' नरम लकड़ी के लट्ठे या पेड़ के मोटे तने में रहना पसंद करते है |
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